क्या आरएसएस की सियासी दावत में शिरकत करेंगे राहुल गांधी– सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूर्व सदर प्रणव मुखर्जी की तरह राहुल गांधी भी संघ के कार्यक्रम में षामिल होकर पार्टी विचारधारा से हटकर संघ के नेताओं की शन में तारीफों के पुल बांधेंगे या फिर ——

क्या आरएसएस की सियासी दावत में शिरकत करेंगे राहुल गांधी– सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूर्व सदर प्रणव मुखर्जी की तरह राहुल गांधी भी संघ के कार्यक्रम में षामिल होकर पार्टी विचारधारा से हटकर संघ के नेताओं की शन में तारीफों के पुल बांधेंगे या फिर ——

शिबली रामपुरी
कुछ समय से अपने बयानों से आरएसएस को लगातार कटघरें में खडा कर रहे कांगे्रस के राहुल गांधी को संघ की ओर से अपने कार्यक्रम में आने का न्यौता दिए जाने की खबरें सामनें आ रही हैं।ं जिसके बाद से सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पूर्व सदर प्रणव मुखर्जी की तरह राहुल गांधी भी संघ के कार्यक्रम में षामिल होकर पार्टी विचारधारा से हटकर संघ के नेताओं की शन में तारीफों के पुल बांधेंगे या फिर वहां जाने से ही राहुल इंकार कर देंगे।गौरतलब हो कि राहुल गांधी काफी समय से संघ के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर रहे हैं। जितनी तेजी के साथ वो भारत में संघ पर हमला बोलते हैं उससे ज्यादा आक्रामक अंदाज उनका विदेशों में संघ के प्रति रहता हैं। इससे किसी ना किसी तरह से संघ में बौखलाहट का माहौल हैं और उसने राहुल गांधी को अपने कार्यक्रम में बुलाने का इरादा किया हैं। हालांकि इसे एक तरह से सियासी दावत भी करार दिया जा सकता हैं। क्योकि जल्दी ही 2019 के लोकसभा चुनाव भी आने वाले हैं और भाजपा के जो सहयोगी दल 2014 के चुनाव में उसके साथ थे उनमें से कई भाजपा की नीतियों से नाराज नजर आते हैं। जिनको मनाने में भाजपा अध्यक्ष से लेकर पार्टी के कई सीनियर नेता जी जान से जुटे हुए हैं। ऐसे में यदि राहुल गांधी संघ के कार्यक्रम में शिरकत करते हैं तो ये संघ से लेकर भाजपा तक के हक में रहेगा। भाजपा राहुल गांधी की संघ नेताओं से मुलाकात को 2019 के चुनाव में भुनाने का पूरा प्रयास करेंगी। दरअसल संघ का राहुल को अपने कार्यक्रम में बुलाने का मकसद साफ हैं कि वो राहुल गांधी की उन गलतफहमियों को दूर करना चाहता हैं कि जिनको लेकर राहुल गांधी बार बार संघ पर हमालावर होते रहते हैं। युं तो आरएसएस एक नही बल्कि कई बार ये बताता रहा हैं कि संघ की देशभक्ति और जनता के हक मेें किए गए सराहनीय कार्यो की प्रशंसा कांगे्रस के जहां कई नेता कर चुके हैं वहीं कांगे्रस की सरकार के ही कई प्रधानमंत्री तक संघ के जनहित के कार्यो को सराह चुके हैं। संघ का तो यहां तक कहना हैं कि महात्मा गांधी तक संघ के कार्यो की तारीफ कर चुके हैं। जहां तक संघ की विचारधारा की बात हैं तो इसमें कोई दो राय नही हैं कि मुसलमानों के संबंध में संघ की विचारधारा मुस्लिम विरोधी ही रही हैं। हालांकि कुछ साल पहले मुसलमानों को संघ से जोडने के लिए संघ की ओर से एक संगठन मुस्लिम राष्ट्ीय मंच बनाया गया था। जिसमें कुछ मुसलमानों को इस संगठन से जोडा गया और संघ की ओर से ये संदेश मुसलमानों को देने का प्रयास किया गया हैं कि संघ का नजरिया किसी तरह से भी मुस्लिम विरोधी नही रहा हैं। कुछ राजनीतिक या खुद को सेकुलर कहने वाले सियासी पार्टीयों की ओर से मुसलमानों केा वोट बैंक के नाम पर गुमराह किया जाता रहा है। जबकि संघ मुस्लिम विरोधी नही हैं। इस संगठन की जिम्मेदारी संघ के सीनियर नेता इंद्रेश का सौपी गई हैं। हालांकि ये भी हकीकत हैं कि इस संगठन से सिर्फ वो मुसलमान ही जुडे हैं कि जिनको इस्लाम की कम जानकारी है या फिर जो सत्ता में बैठे लोगों के करीब रहना चाहते हैं। इस संगठन के किसी भी कार्यक्रम में ऐसे एक भी मुस्लिम को अभी तक शामिल होते नही देखा गया हैं कि जिसकी आवाज मुसलमानों में गंभीरता से सुनी जाती हो या अहमियत दी जाती हो। इससे साफ हैं कि संघ को मुसलमानों से जोडना काफी कठिन काम हैं। क्योकि मुसलमानों के दिल और दिमाग में जो नजरिया संघ के प्रति बैठा हुआ हैं। जिसे संघ गलतफहमी बताता है वो दूर करना काफी कठिन हैं। जहां तक राहुल गांधी की संघ के कार्यक्रम में जाने की बात हैं तो ये राहुल पर निर्भर करता हैं कि वो वहां पर जायेंगे या नही और यदि वो वहां जाते हैं तो क्या वहां पर भी संघ के बारें में वही सबकुछ कहें्रगे कि जो वो देश और विदेश तक में संघ के बारें में लगातार बोलते रहे हैं। वैसे तो महसूस यही होता हैं कि राहुल गांधी संघ के कार्यक्रम में नही जायेंगे क्योकि ऐसा करने से राहुल से वो वोट दूर जा सकता हैं कि जिसके भरोसे कांगे्रस अपनी डूबती नैया को पार लगाती रही हैं। युं तो ये भी कहा जा रहा हैं कि जिस तरह से राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गले लगा लिया था तो वो संघ के कार्यक्रम में भी जा सकते हैं। हालांकि ये चर्चा भी गर्दिश कर रही हैं कि मोदी प्रधानमंत्री हैं और प्रधानमंत्री सबका होता हैं। इसलिए राहुल ने देश के प्रधानमंत्री को गले लगाया था। बहरहाल राहुल गांधी का संघ के कार्यक्रम में जाना आगामी लोकसभा चुनाव की दिशा और दशा दोनो तय कर सकता हैं।

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