खतौली मे *एक शाम कौमी एकता के नाम* से ऑल इंडिया मुशायरा — मुशायरे में उर्दू शायरी के अनेक रंग बिखरे!  देश भक्ति के तराने भी गूंजे,कौमी एकता, आपसी भाईचारे का पैगाम भी दिया गया, शायरों ने अपने कलाम के जरिए हुस्न और इश्क़ की  रंगीन वादियो  की सैर भी कराई,और देश के मौजूदा हालात पर तंज भी कसे।

खतौली मे *एक शाम कौमी एकता के नाम* से ऑल इंडिया मुशायरा — मुशायरे में उर्दू शायरी के अनेक रंग बिखरे!  देश भक्ति के तराने भी गूंजे,कौमी एकता, आपसी भाईचारे का पैगाम भी दिया गया, शायरों ने अपने कलाम के जरिए हुस्न और इश्क़ की  रंगीन वादियो  की सैर भी कराई,और देश के मौजूदा हालात पर तंज भी कसे।

 खतौली –  मुशायरे में उर्दू शायरी के अनेक रंग बिखरे!  देश भक्ति के तराने भी गूंजे,कौमी एकता, आपसी भाईचारे का पैगाम भी दिया गया, शायरों ने अपने कलाम के जरिए हुस्न और इश्क़ की  रंगीन वादियो  की सैर भी कराई,और देश के मौजूदा हालात पर तंज भी कसे। बारिश के कारण यह मुशायरा नगर पालिका खतौली प्रांगण में न होकर सिटी पैलेस बुढ़ाना रोड पर आयोजित किया गया था। जिसमें हजारों की  तादाद में मौजूद श्रोता सुबह की अज़ान तक मुशायरे का लुत्फ लेते रहे ।
पूरी रात मुशायरा पंडाल श्रोताओं की तालियों से गूंजता रहा।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग अध्यक्ष प्रोफ़ेसर असलम जमशेदपुर और वरिष्ठ सपा नेता क़ाज़ी जमील अहमद की मुश्तरका सदारत में तथा मशहूर शायर रियाज़ साग़र के सफल संचालन में आयोजित इस मुशायरे में कोटा  तशरीफ लाए मशहूर शायर और गीतकार कुँवर जावेद ने श्रोताओं की तालियां बटोरते हुए कहा,,,
*प्यार तो दोस्तों अनजाने में हो जाता है!*
 *प्यार की पहले से तैयारी नहीं की जाती !!*
*कुर्सियां दोस्तों हम से भी कोई दूर नहीं!*
*क्या करें देश से गद्दारी नहीं की जाती!!*
महाराष्ट्र के मालेगांव से आए अल्ताफ ज़िया ने बहुत देर तक श्रोताओं को बांधे रखा इन्होंने एक के बाद एक कई गजलें भी पढ़ कर खूब दाद बटोरी… उनका कलाम  ,,,,
*तन्हाई में जब जब तेरी यादों से मिला हूं!*
 *महसूस हुआ है कि तुम्हें देख रहा हूं!!*
 *दुश्मन मेरा मुझसे ही मदद मांग रहा था!*
 *यूं ही नहीं हाथों से यह तलवार गिरी है।* 
कानपुर की शयरा मोहतरमा  शाइस्ता सना ने पढा,,,,, 
*मेरा महबूब है मजदूर मगर उसने मुझे!*
 *अपनी कुटिया में भी रानी की तरह रखा है!*
आज़मगढ़ से पधारे शाह खली का कलम…
*सच बोलता रहा मैं गुनहगार हो गया!*
*वह झूट बोल बोल के सरदार हो गया!!*
 अवध की सरज़मीन से पधारे काविश रुदौलवी का यह शेर बेहद पसन्द किया गया।
*साज़िश करने वाले साज़िश करते रहे!*
*इज़्ज़त देने वाला है मेरा अल्लाह!!*
खतौली में पहली बार तशरीफ लाई चांदनी शबनम ने पढ़ा,,,,
*चांदनी ने कहा ऐ मेरे चाँद सुन!*
 *रौज़ छत पे बुलाना चलेगा नहीं!!*
*मैं तेरे प्यार में यार मदहोश थी तेरी यादें समेटे मैं बेहोश थी!*
 *फिर तो ऐसा हुआ मेरे प्यारे पिया तूने मुझको जगाया मज़ा आ गया।*
मुशायरे की खूबसूरत 
निज़ामत करते हुए रियाज़ सागर ने देश भक्ति को समर्पित कलाम पेश करते हुए कहा…..
*मेरी वफाओं का मुझसे सबूत मत मांगो!* *वतन से प्यार का जज़बा तो मेरे दिन में है!!*
 *अटूट रिश्ता है मेरा वतन की मिट्टी से मेरे बुजुर्गों की खुशबू इसी ज़मीन में है!*!मुजफ्फरनगर से आए शायर खुर्शीद हैदर ने सामाजिक परिवेश पर तंज कसते हुए कहा,,,
*बेटा एक वक्त की रोटी नहीं देता फिर भी!* 
*माँ यही कहती है सबसे मेरा लाल अच्छा है।* अंत में मशहूर शायर डॉ माजिद देवबंदी को बडे एहतराम के साथ सुना गया उन्होंने पढ़ा,,,,
*मैं अपनी बीवी को सबसे बुरा समझता हूं!*
 *मगर उसी ने मेरा घर बचा के रक्खा है!!*
 *अल्लाह मेरे रिज़्क़ की बरकत न चली जाए!*
 *दो रोज़ से घर में कोई मेहमान नहीं है।*
    इसके अलावा असलम चिश्ती (पुणे),सिकन्दर हयात गड़बड़,सज्जाद झन्झट,जावेद आसी ने भी अपना कलाम पेश किया।
मुशायरे में विशिष्ठ अतिथि सपा नेता चंदन चौहान, राष्ट्रीय लोक दल के महासचिव लतेश बिधूड़ी, सरधना चेयरमैन निजाम अंसारी खतौली एसडीएम इंदिराकांत द्वेदी  खतौली सीओ डॉ राजीव कुमार सिंह शरीक हुए।
स्वागत समारोह का संचालन खतौली के नौजवान शायर परवेज़ गाजी ने अपने खूबसूरत अंदाज में किया इस अवसर पर डॉक्टर अमीर आजम कुरेशी और डाक्टर एहतेशाम सिद्दीकी को उनके उर्दू अदब और सामाजिक सेवा के लिए एवार्ड दिए गए।और मुशायरे की बेहतरीन निज़ामत के लिए मशहूर शायर रियाज़ साग़र को एवार्ड देकर सम्मानित किया गया।
रात 10 बजे शुरू हुआ यह मुशायरा अपनी ऐतिहासिक बुलंदियों को छूता हुआ सुबह की अज़ान पर संम्पन हुआ।इस मुशायरे के कन्वीनर असजद सैफ़ी रहे।

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