मुसलमानों के बारें में क्या बदल रहा है संघ का नजरिया —

मुसलमानों के बारें में क्या बदल रहा है संघ का नजरिया —

शिबली रामपुरी

आरएसएस का मुसलमानों के प्रति क्या नजरिया बदल रहा है या फिर ये सब लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों मे होने वाले विधानसभा चुनाव की एक तैयारी है कि जिससे भाजपा को मुसलमानों के वोट मिल सके। हाल ही में आरएसएस के सरबराह मोहन भागवत ने आरएसएस के एक कार्यक्रम में मुसलमानों के बारे में जो बाते कही वो शायद ही आरएसएस के उनसे पहले किसी नेता ने कही हों। अब तक संघ का जो नजरिया मुसलमानों के संबंध में रहा है वो किसी से छुपा नही है। आरएसएस के नेताओं ने जो कुछ अपनी किताबों मे मुसलमानों के बारे मेें लिखा है वो भी संघ के नजरिये को पूरी तरह से बयान करता है। लेकिन मोहन भागवत ने संघ का जो मौजूदा नजरिया मुसलमानों के बारे में बयान किया वो एक बार को हैरान करने वाला हैं। वैसे तो संघ अपने एक संगठन मुस्लिम मंच के माध्यम से देश के मुसलमानों को जोडने के लिए कई साल से प्रयास कर रहा हैं। आरएसएस नेता इन्द्रेश के नेतृत्व में मुस्लिम मंच से मुसलमानों को जोडने की इस कोशिश में अभी तक कोई खास सफलता तो मिली नही हैं मगर फिर भी कुछ मुसलमान मंच से जरूर जुडे हैं और उनमें से कुछ टीवी चैनलों पर होने वाली डिबेट में अपनी बात रखते भी दिखाई देते हैं। मुस्लिम मंच की ओर से रमजान या ईद वगैरा पर कुछ जगहों पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहे हैं। मंच से अधिक संख्या में मुसलमानों के ना जुडने का कारण साफ हैं कि मंच आरएसएस का ही एक संगठन है जो आरएसएस के विचारों को ही सामने लाता है और ये एक कडवी हकीकत हैं कि जिसे तमाम प्रयासों के बावजूद भी नजरअंदाज नही किया जा सकता हैं कि आरएसएस मुसलमानों में हमेशा से मुस्लिम विरोधी के तौर पर ही देखा जाता रहा है। इसी कारण संघ के राजनीतिक संगठन भाजपा मेें भी मुसलमानों की संख्या ना के बराबर ही है। ये बात अलग है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद कुछ संख्या में मुसलमानों का रूख भाजपा की ओर होता नजर आता है। ये कहना भी गलत नही होगा कि भाजपा में एक समय ऐसा भी रहा हैं कि जब मुसलमानों को काफी अहमियत पार्टी में दी जाती थी मगर अब दौर बदल चुका है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब यूपी मेें विधानसभा चुनाव हुए थे तब भाजपा की ओर से एक भी मुसलमान को टिकट नही दिया गया था। भले ही भाजपा की ओर से सबका साथ सबका विकास जैसी काबिले तारीफ बातें पूरे जोश खरोश से की जाती हों मगर राजनीतिक तौर पर भाजपा में मुसलमानों को नजरअंदाज ही किया जाता रहा हैं। मौजूदा दौर की बात करें तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी जानते हैं कि दलितों की एक बडी आबादी जो लोकसभा चुनाव में भाजपा के हित मेें थी वो आगामी चुनाव में भाजपा की बजाय किसी और पार्टी की ओर भी रूख कर सकती है। हालांकि भाजपा की ओर से दलितों को अपने पक्ष में करने के हरसंभव प्रयास जारी हैं। ऐसे में भाजपा मुसलमानों पर भी डोरे डालने का प्रयास कर रही है।अभी कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंदौर में बोहरा समाज की मस्जिद में पहुंचे और वहां उन्होंने काफी समय भी गुजारा और बोहरा समाज के कार्यो की सराहना भी की। वैसे तो पीएम मोदी विदेशों में कई मस्जिदों में जा चुके हैं। लेकिन भारत में वो पहली बार किसी मस्जिद में गए। काबिले गौर हो कि मोदी को कई बार मुसलमानों के किसी कार्यक्रम में मुस्लिम टोपी पहनने को दी गई तो पीएम मोदी ने मुस्लिम टोपी पहनने से साफ इंकार कर दिया था। ऐसे में पीएम मोदी के बोहरा समाज की मस्जिद में जाने के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं कि लोकसभा और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा मुसलमानों के वोट चाहती हैं। इसी नजरिये को सामने रखते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत भी अपने बयानों में मुसलमानों पर मेहरबान दिखे और आरएसएस के उनसे पूर्व के नेताओं के द्वारा मुसलमानों के बारे में लिखी गई बातों के बारे में सवाल करने पर भी भागवत ने उनको हालात और समय के मुताबिक बताया। मोहन भागवत ने अपने बयान से ये संदेश देने में कोई कमी बाकी नही रखी कि संघ मुस्लिम विरोधी नही है और वो मुसलमानों का भी विकास चाहता हैं। लेकिन यहां ये सवाल भी खडा होता हैं कि जब संघ मुस्लिम विरोधी नही है तो फिर भाजपा की ओर से मुसलमानों को राजनीतिक तौर पर क्यूं नजरअंदाज किया जाता हैं।अब मोहन भागवत के मुसलमानों के बारे में दिए गए बयान का आगामी चुनावों में कितना असर होता हैं। इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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