राहुल ने साबित की अपनी काबलियत

राहुल ने साबित की अपनी काबलियत

शिबली रामपुरी
ऐसे समय में कि जब कांगे्रस का अपना सबसे बुरा दौर चल रहा है।ऐसे में जिस तरह से कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांगे्रस ने उम्मीद से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है उससे ये साबित होता है कि जिस जनता ने कभी कांगे्रस को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था उसी जनता का विश्वास फिर से कांगे्रस पर कायम होने लगा हैं।हालांकि आगामी लोकसभा चुनाव में कांगे्रस को भाजपा का कडा मुकाबला करना है और जरूरी नही है कि लोकसभा चुनाव में कांगे्रस सत्ता तक पहुंचने में कामयाब हो जाए लेकिन फिलहाल जिस तरह के चुनावी नतीजे कांगे्रस के हक में आएं हैं।उसका पैगाम कम या ज्यादा तौर पर आगामी विधानसभा चुनाव तक जरूर जायेंगा।विधानसभा चुनावों में आए शानदार परिणामों से कांगे्रस के अपने सबसे खराब दौर से निकलने की शुरूआत हो चुकी है।हालांकि कुछ राजनीति के महारथी ये भी कह रहे है कि ये कांगे्रस की लोकप्रियता का कमाल नही बल्कि कई मामलों में भाजपा सरकार के नाकाम रहने की वजह हैं।भाजपा ने सत्ता में आने से पहले जो अच्छे दिन लाने के सपने जनता को दिखाए थे वो अभी तक सपने ही बने हुए हैं।कांगे्रस पर महंगाई बढाने का आरोप लगाने वाली भाजपा के शासन में खुद महंगाई ने आम आदमी को कितना परेशान किया हैं।ये किसी तरह से छुपी बात नही हैं।ऐसा नही है कि भाजपा ने जनता के लिए कोई विकास नही किया लेकिन ये भी हकीकत है कि जिन वादों के सहारे भाजपा सत्ता में आई थी वो आज भी बहुत हद तक अधूरे ही हैं।इन चुनावों में कांगे्रस के बेहतर प्रदर्शन की बात करें तो इसके लिए राहुल गांधी की मेहनत को भी हम नजरअंदाज नही कर सकते हैं।राहुल गांधी को विपक्षी पार्टीयों की तरफ से क्या क्या नही कहा गया।उनको एक कमजोर नेता से लेकर कई तरह के जुमलों और कटाक्ष से निशाना बनाया गया।लेकिन राहुल गांधी ने पार्टी की कमान हाथ में लेने के बाद खुद को एक बेहतर और काबिल नेता साबित कर दिया हैं।राहुल गांधी की ईमानदारी पर तो किसी तरह का शक किया ही नही जा सकता है वहीं कई राज्यों के चुनाव नतीजों ने तो राहुल गांधी की कुशल राजनीति को भी उनकी सियासी काबलियत को भी साबित कर दिया हैं कि राहुल गांधी अब एक मजबूत और तजुर्बेकार नेता बन चुके हैं और इस बात को अब भाजपा की सहयोगी कुछ पार्टीया भी माननें लगी हैं।जिनमें शिवसेना का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता हैं।कभी शिवसेना राहुल गांधी को एक कमजोर नेता के तौर पर बताया करती थी मगर काफी वक्त से शिवसेना की ओर से राहुल की सियासी कुशलता के बारें मे ऐसे बयान आए कि जिनमें राहुल गांधी की प्रशंसा की गई।बहरहाल जहां पर भी कांगे्र्रस को सत्ता हासिल होती है वहां पर कांगे्रस के सामने सबसे बडी चुनौती जनता की उन उम्मीदों पर खरा उतरने की रहेंगी कि जिन पर भरोसा करके जनता ने कांगे्रस को यहां सत्ता तक पहुंचाने का काम किया है।दूसरी ओर भाजपा को ये बात गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है कि ऐसे वक्त में कि जब भाजपा का सबसे सुनहरा दौर चल रहा है उसमें भी भाजपा को आखिर क्यूं पराजय का मुंह देखना पडा हैं।

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